Category Archives: Jyotish

कुंडली में राहु-केतु का फल विचार

कुंडली में राहु-केतु का फल विचार

राहु बारहवें भाव में नीच होता है और उसका कारक भाव भी है तथा केतु छठे भाव में नीच होता है और उसका कारक भाव भी है।

उच्च राशि ग्रहों के फल

उच्च राशि ग्रहों के फल

कुंडली में १२ भाव होते है और ९ राशि होती है। प्रत्येक ग्रह किसी एक राशी में उच्च स्थिति में होता है और उससे ठीक सातवे स्थान पर नीच स्थिति का होता है।

शनि अनिष्ट निवारक नीलम रत्न

शनि अनिष्ट निवारक नीलम रत्न

शनि की अशुभता निवारण करने वाला रत्न नीलम है। नीलम रत्न धारण करने से शनि की अशुभता कम हो सकती है अथवा बिल्कुल भी समाप्त हो सकती है।

तैंतीस अंकीय शनि यंत्र

तैंतीस अंकीय शनि यंत्र

यह तैंतीस अंकीय शनि यंत्र अति विशिष्ठ एवम् प्रभावकारी है। इस यंत्र की रचना लोहे अथवा जस्ते के पत्र अथवा भोजपत्र पर काली स्याही से करें।

शनि की साढ़ेसाती

शनि की साढ़ेसाती shani-sadesati

शनि गोचर में परिभ्रमण करता हुआ जन्मराशि से बारहवें भाव में आता है तब वह वहां पर ढाई वर्ष तक निवास करता है बाद में वह जन्मराशि में ढ़ाई वर्ष रहता है और पुनः जन्म राशि से दूसरे भाव में ढाई वर्ष की अवधि तक रहता है। यही शनि की साढ़े साती है।

शनि और बुध के योग का फल

शनि और बुध के योग का फल

कुण्डली के प्रथम भाव में शनि और बुध का योग हो तो जातक परोपकारी तथा सरल हृदय वाला होगा। सत्यभाषी होने के कारण उसे सम्मान तो मिलेगा किन्तु यदा-कदा अपयश भी प्राप्त होगा।

शनि और चन्द्र के योग का फल | Shani Chandra Yuti

शनि और चन्द्र के योग का फल

जातक को शनि चन्द्र योग ग्रह के प्रभाव से अपमानित एवम् संघर्षमय जीवन व्यतीत करना पड़ता है। जातक लम्बी आयु वाला संघर्षशील होगा।