ज्योतिष

किस पाये में बालक का जन्म हुआ
भावकारक और स्थिरकारक
गुरु दशाफल विचार
न करने योग्य शारीरिक चेष्टाएँ
न करने योग्य शारीरिक चेष्टाएँ
RAJKUMAR JAIN 28/11/2021

दोनों हाथों से अपना सिर नहीं खुजलाना चाहिये। दाँतों से नाखून, रोम अथवा केश नहीं चबाना चाहिये। पैर से कभी पैर न धोये। सिर के बाल पकड़कर खींचना और सिरपर प्रहार करना वर्जित है।

राजयंत्र विशेष

विशिष्ट राजयोग विचार
विशिष्ट राजयोग विचार
RAJKUMAR JAIN 10/2/2022 rajyog

केन्द्रेश और त्रिकोणेश का आपस मे सम्बन्ध होना 'योग' कहलाता है । 'राज' शब्द ऐश्वर्य-बोधक है इस कारण कुण्डली में कोई भी योग हो, यदि उसका फल शुभ, धनकारक, समृद्धि या उत्कर्ष करने वाला होता है तो उसे ज्योतिषियो की भाषा में 'राजयोग' कहते हैं।

चतुर्थ स्थान में चन्द्र
चतुर्थ स्थान में चन्द्र

चतुर्थ स्थान का चन्द्र पानी से संबन्धित व्यापार से व्यक्ति को लाभ देता है।