Category Archives: Jyotish

शनि और सूर्य के योग से द्वादश भावों का फल

शनि और सूर्य के योग से द्वादश भावों का फल

प्रथम भाव में शनि के साथ सूर्य का योग होने पर धन की कमी, पारिवारिक कलह, संचित सम्पत्ति का नष्ट होना, उन्माद, अकर्मण्यता, रोग-व्याधि आदि का प्रभाव रहता है।

शनि की शुभ एवम् अशुभ दशाओं का फल

शनि की शुभ एवम् अशुभ दशाओं का फल

कुण्डली में शनि की शुभ- दशा हो तो जातक कारोबार में लाभ, व्यावसायिक लाभ, अधिकारी होना या जातक गांव, नगर अथवा प्रदेश में विशिष्ठ पद प्राप्त करता है ।

चन्द्रमा का बारह भावो पर दृष्टि का फल | Chandra Drashti Fal

चन्द्रमा का बारह भावो पर दृष्टि का फल | Chandra Drashti Fal

लग्न को चन्द्रमा पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक प्रवासी, व्यवसायी, भाग्यवान्, शौकीन, कृषण और स्त्रीप्रेमी होता है।

सूर्य का बारह भावो पर दृष्टि का फल | Surya Drashti Fal

सूर्य का बारह भावो पर दृष्टि का फल

प्रथम भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक रजोगुणी, नेत्ररोगी, सामान्य धनी, साधुसेवी, मन्त्रज्ञ, वेदान्ती, पितृभक्त, राजमान्य और चिकित्सक होता है।

क्या होगा व्यापार, आजीविका विचार

क्या होगा व्यापार, आजीविका विचार

तृतीय स्थान से आजीविका का भी विचार किया जाता है। लग्न, चन्द्रमा और सूर्य इन तीनों ग्रहों में से जो अधिक बलवान् हो, उससे दसवें स्थान के नवांशाधिपति के स्वरूप, गुण, धर्मानुसार आजीविका ज्ञात करनी चाहिए।

मन्त्रों के विभिन्न स्वरूप (आग्नेय मन्त्र और सौम्य मन्त्र)

mantra-swaroop-somya-agney

मन्त्र-व्याकरण में मन्त्र-समुदाय के दो प्रकार दिखाये गये हैं- आग्नेय मन्त्र और सौम्य मन्त्र। इनमें जो मन्त्र पृथ्वी, अग्नि और आकाश तत्व से युक्त होते हैं वे ‘आग्नेय’ कहलाते हैं तथा जल और वायु तत्त्व से युक्त होते हैं वे ‘सौम्य’ कहलाते हैं।

ग्रह दोष निवारण धातु की अंगूठी

grah-dosh-nivaran-ring-metal

ताँबा की अंगूठी रविवार के दिन प्रातः काल गाय के दुग्ध व घृत में डुबोकर मंत्र जाप करता हुआ धारण करने से रवि ग्रह दोष निवारण होता है।

शुक्ल तथा कृष्ण पक्ष

शुक्ल कृष्ण पक्ष

एक चन्द्रमास में शुक्ल तथा कृष्ण पक्ष होते हैं। शुक्लपक्ष के अन्त में 15वीं तिथि को पूर्णिमा तथा कृष्णपक्ष के अन्त में 30वीं तिथि को अमावस्या कहते हैं।