यदि लग्न में सूर्य हो तो जातक शूरवीर, रण निर्भय, कठोर हृदय होता है। दूसरे व्यक्ति उसे विचलित नही कर सकते । यह सामान्य फल है।
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जन्म-लग्न से जिस भाव मे चन्द्रमा हो उस भाव के अनुसार ‘पाया’ निर्धारित किया जाता है।
जब शुभ भाव के स्वामी केन्द्र आदि शुभ स्थानो मे स्थित होकर शुभयुक्त अथवा शुभदृष्ट होंगे तो मनुष्य को सुख आदि की प्राप्ति होगी
सिंह लग्न में मांगलिक दोष निवारण के लिए सोमवार के दिन 6 वर्ष की कन्याओं को भोजन करावें ग्यारह कन्याओं को पाँच सोमवार भोजन कराना है।
बृहस्पति (गुरु) ग्रह शान्ति के घरेलू टोटके
गुरु की महा दशा में ज्ञानलाभ, धन-अस्त्र-वाहन-लाभ, कण्ठ रोग, गुल्मरोग, प्लीहा रोग आदि फल प्राप्त होते हैं।
जिस किसी की कुण्डली में गुरु यदि अपनी उच्च राशि में स्थित हो, तो उसकी दशा के समय मनुष्य के भाग्य की अभिवृद्धि होती है।
पीले शीशे की बन्द बोतल में शुद्ध पानी भरकर धूप में रखें और इस पानी को सोते समय दो चम्मच पियें। निर्बल सूर्य को सबलता प्राप्त होगी।
जन्म कुण्डली के लग्न स्थान से म. 1/4/7/8/12वें स्थान में मंगल हो तो ऐसी कुण्डली मंगलीक कहलाती है।
पानी को छानकर ही प्रयोग करना चाहिए। अगर पानी गंदा हो तो, पीने से पहले उसको किसी भी विधि द्वारा फिल्टर करना चाहिए। कठोर पानी पीने योग्य नहीं होता। उबला हुआ पानी स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद होता है।