यहां भाग्येश गुरु केन्द्र में मकर राशि (नीच) गत होते हुए भी शुभ फल देगा। भाग्येश, भाग्य स्थान से ग्यारहवां होने से जातक को पिता की सम्पत्ति, कुल व प्रतिष्ठा का लाभ
मिलेगा। गुरु की दृष्टि एकादश भाव पर होने के कारण जातक को अपने धंधे-व्यापार में उत्तम लाभ मिलेगा।
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सूर्य और चन्द्र एकत्र होने से व्यक्ति कुशल, कुयोजनावादी तथा तकनीकज्ञ बनता है।
कर्क लग्न के लिए सूर्य मारकेश होकर भी मारक नहीं है। शुक्र सहायक मारकेश का काम करेगा। शनि एवं बुध परम पापी व अशुभ हैं। आयुध्य प्रदाता ग्रह चन्द्र है।
जब चन्द्रमा की महादशा अन्तर्दशा हो तो कन्या-सन्तति की प्राप्ति हो, उज्वल वस्त्र मिलें, उत्तम ब्राह्मणों का समागम हो, माता की प्रसन्नता की बात हो और जातक को अपनी स्त्री का सुख हो।
सूर्य मेष राशि में होने से जातक गौर वर्ण, बुद्धिमान, शूर, चतुर, यात्रा करने में रुचि लेने वाला, ठाठबाट वाला, उदार, अपने परिश्रम से अधिकार प्राप्त करने वाला, प्रसिद्ध एवं ख्यातिवान होता है।
प्रतयेक कुण्डली में एक विशेष ग्रह होता है, जो कुण्डली का प्राण होता है। इस ग्रह के कमजोर होने पर व्यक्ति कों सफलता नहीं मिलती है, अगर मिलती भी है तो बड़ी मुशकीलों का सामना करना पड़ता है।
सूर्य से-पिता, चन्द्रमा से-मन, मंगल से-पराक्रम, बुध से-विद्या, गुरु से-बुद्धि, पुत्र और ज्ञान शुक्र से-स्त्री, वाहन, शनि से आयु, जीवन, मृत्यु, राहु से-पितामह (पिता का पिता) केतु से-मातामह (नाना) का विचार करें।
नक्षत्रों की कुल संख्यां 27 होती है ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों को तीन-तीन नक्षत्रों का आधिपत्य दिया गया है
सर्वकार्य लाभदाता बीसायन्त्र कार्यक्षेत्र में सफलता, व्यापार में उन्नति, मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति, आकर्षण शक्ति प्रदान कर समस्त कार्य सिद्ध करता है।