बाल रक्षा बीसा यन्त्र के प्रभाव से बालक, बालिका को भय, चमक, डर आदि उपद्रव नहीं होते है।
Category Archives: Jyotish
संपूर्ण ज्योतिष मुख्य रूप से नौ ग्रहों, बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्रों और बारह भावों (भाव) पर आधारित है।
मनुष्य की जन्म कुंडली में बारह घर अथवा भाव होते है। तनु, धन, सहज, सुख, पुत्र, रिपु, जाया, आयु, धर्म, कर्म, लाभ, व्यय हर भाव कुछ कहता है।
मंगल की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा में पित्त, उष्णता होने या चोट लगने का भय हो, भाईयों से वियोग हो । जाति के लोगों से, शत्रुओं से, राजा से तथा चोरों से विरोध हो । अग्नि पीड़ा का भय हो ।
सभी ग्रह सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं। अर्थात कोई भी ग्रह कुण्डली के जिस भाव में भी बैठा हो, उससे सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है।
केतु की महादशा में केतु की अन्तर्दशा में शत्रुओं से कलह हो, मित्रों से विरोध हो. अशुभ वचन सुनने पड़ें, शरीर में बुखार तथा तपिश की बीमारी हो। दूसरे के घर जाना पड़े और धन का नाश हो
गुरु की महादशा में गुरु की अन्तर्दशा में
सौभाग्य की वृद्धि हो, कान्ति बड़े। सब ओर से मान-सम्मान मिले।
तुला लग्न वालों के लिए मंगल द्वितीयेश होकर भी मारक का कार्य नहीं करेगा। गुरु षष्टेश होने से अशुभ फलदायक है। सूर्य व शुक्र पापी हैं। मंगल साहचार्य से मारक का कार्य करेगा। आयुष्य प्रदाता ग्रह शुक्र है।