स्वप्न फल तथ्य

प्रथम प्रहर का स्वप्न अति दूर जाकर फल देता है। दसरे प्रहर का स्वप्न उससे थोड़ा जल्दी फल देता है तीसरे प्रहर का स्वप्न और जल्दी फल देता है किन्तु अन्तिम प्रहर का स्वप्न शीघ्राति शीघ्र फल देता है।

स्वप्न फल तथ्य
swapnafal, स्वप्न फल

स्वप्नों का फल शुभाशुभरूप में होता है यह कर्मोदय से आता है। स्वप्न तीन कारणों से आता है बातज, पीतज, कफज, ये रोगजनित स्वप्न है, रोगजनित स्वप्नों का फल मिथ्या होता है, उसका कोई फल नहीं होता। प्रथम प्रहर का स्वप्न अति दूर जाकर फल देता है। दसरे प्रहर का स्वप्न उससे थोड़ा जल्दी फल देता है तीसरे प्रहर का स्वप्न और जल्दी फल देता है किन्तु अन्तिम प्रहर का स्वप्न शीघ्राति शीघ्र फल देता है।

स्वप्नों के फल कृष्णपक्ष और शुक्ल की तिथियों के अनुसार होते हैं कृष्णपक्ष की कुछ तिथियों में आने वाले स्वप्न मिथ्या होते हैं या उल्टा फल होता है। शुक्ल पक्ष तिथियों में आने वाले स्वप्नों का फल अवश्य होता है। मांगलिक द्रव्य, पंचपरमेष्ठि आदि स्वप्न में देखने पर उसका फल शुभ होता है, अमांगलिक वस्तुओं के देखने पर शुभफल भी और अशुभफल भी होता है। दिन में तन्द्रारूप में यदि किसी को स्वप्न दिखे तो उसका कोई फल नहीं होता हैं। अशुभ स्वप्नों के आने पर तुरन्त वापस सो जावे और प्रात: उठकर शान्ति कर्म अवश्य करे। शुभ स्वप्नों के आने पर फिर सोवे नहीं। अशुभ स्वप्न दिखने पर सोना परम आवश्यक है सो जाने पर उस स्वप्न का फल नष्ट हो जाता है।

स्वप्न शास्त्र में प्रधानतया निम्न सात प्रकारके स्वप्न बताये गये है।
दृष्ट - जो कुछ जागृत अवस्था में देखा हो उसीको स्वप्नावस्थामें देखा जाय।
श्रुत - सोने के पहले कभी किसीसे सुना हो उसीको स्वप्नावस्थामें देखे।
अनुभूत - जो जागृत अवस्था में किसी भौति अनुभव किया हो, उसीको स्वप्न देखना अनुभूत है।
प्रार्थित - जिसकी जागृतावस्था में प्रार्थना-इच्छाकी हो उसीको स्वप्न में देखे।
कल्पित - जिसकी जागृतावस्था में कल्पनाकी गई हो उसीको स्वप्नमें देखें।
भाविक - जो कभी न तो देखा गया हो और न सुना हो, पर जो भविष्यमें होनेवाला हो उसे स्वपमें देखा जाय।
दोषण - वात, पित और कफ इनके विकृत हो जाने से देखा जाय।

इन सात प्रकार के स्वप्नों में पहले के पाँच प्रकार के स्वप्न प्रायः निष्फल होते हैं, वस्तुत: भाविक स्वप्न का फल ही सत्य होता है।

रात्रिक प्रहर के अनुसार स्वप्न का फलरात्रि के पहले प्रहर में देखे गये स्वप्न एक वर्ष में, दूसरे प्रहर में देखे गये स्वप्न आठ महीने में, तीसरे प्रहरमें देखे गये स्वप्न तीन महीने में, चौथे प्रहरमें देखे गये स्वप्न एक महीने में, ब्रह्म मुहूर्त [उषाकाल] में देखे गये स्वप्न दस दिनमें और प्रात:काल सूर्योदयसे कुछ पूर्व देखे गये स्वप्न अतिशीघ्र शुभाशुभ फल देते हैं।