चमत्कारी आँवला

आँवले में अधिकांश रोगों को दूर करने की शक्ति है । यह युवकों को यौवन प्रदान करता है और वृद्धों को युवा जैसी शक्ति देता है। इससे दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं। सूखे आंवले का चूर्ण टूटी हड्डी को जोड़ने वाला, बलवीर्य वर्द्धक और मोटापा नाशक है।

चमत्कारी आँवला

चमत्कारी आँवला

आँवला

आँवले में अधिकांश रोगों को दूर करने की शक्ति है । यह युवकों को यौवन प्रदान करता है और वृद्धों को युवा जैसी शक्ति देता है। इससे दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं। सूखे आंवले का चूर्ण टूटी हड्डी को जोड़ने वाला, बलवीर्य वर्द्धक और मोटापा नाशक है। आयुर्वेद के अनुसार इसका स्वाद कसैला व खट्टापन लिये होता है जिससे प्लीहा या तिल्ली (Spleen) को हितप्रद है । आँवला रक्त, पित्त व प्रमेह को दूर करने वाला अत्यधिक धातुवर्द्धक रसायन है। ये त्रिदोष अर्थात् वायु, पित्त और कफ नाश करता है और लगभग सभी रोगों को दूर करने वाला है । इसके फल, छाल व बीज औषधि के रूप में प्रयुक्त होते हैं । मात्रा इस प्रकार निश्चित करें - फल का चूर्ण ३ मासे से १ तोला तक, छाल का क्वाथ २से ५ तोला तक, बीज का चूर्ण १ से २ माशे तक। आँवले का मुरब्बा भी शक्ति-प्रदायक है और गर्भवती के लिये भी हितकर है । एक अच्छा आँवला एक अण्डे से अधिक बल देता है । मस्तिष्क के रोग, हृदय की बेचैनी, दिल की धड़कन, रक्तचाप एवं दाह में घी और आँवला लाभदायक है। रात को सोते समय दस ग्राम आंवले का चूर्ण शहद में मिलाकर लेना चाहिए। इसको चटनी, अचार, शर्बत, मुरब्बा या चूर्ण किसी भी प्रकार से नित्य प्रयोग करना चाहिए।

बच्चों का बिस्तर में पेशाब रोकने के लिए १ ग्राम पिसा हुआ आँवला, १ ग्राम पिसा हुआ काला जीरा और २ ग्राम पिसी हुई मिश्री मिलाकर बच्चे को खिलावें ऊपर से ठण्डा पानी पिलावें। बच्चों के हकलाने या तुतलाने के रोग भी कच्चा आँवला चबाने से ठीक होते हैं। श्वेत प्रदर में तीन ग्राम आँवले का पिसा हुआ चूर्ण, ६ ग्राम शहद के साथ १ माह लेना चाहिए। नित्य खाली पेट ३ ग्राम आँवला और ३ ग्राम मिश्री को जल के साथ लेने से समस्त हदय-रोगों में लाभ होता है। भोजन के बाद १ चम्मच आंवले का चूर्ण लेने से पाचनशक्ति ठीक होती है और दस्त ठीक होते हैं। आँवले के सेवन से नेत्रों की दृष्टि बढ़ती है और भिगोये आँवले के पानी से मुख और आँख धोने से मुख की सुन्दरता और नेत्र ज्योति बढ़ती है। बाल धोने से बाल स्वच्छ व काले होते हैं। हरड़ की तरह आँवला भी षटरस भोजन का ही अंग है, अत: इसको नित्य सेवन करना चाहिये।

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