शनि से तेजी मंदी का विचार

शनि के उदयके तीन दिन बाद रूई तेज होती है। मूंग, मशाले, चावल, गेहूं के भावोंमें घटा-बढ़ी होती रहती है। अश्विनी और भरणी नक्षत्र में शनि वक्री हो तो एक वर्ष तक पीड़ा, धान्य और चौपायो का मूल्य बढ़ जाता है।

शनि से तेजी मंदी का विचार

शनि से तेजी मंदी का विचार

शनि से तेजी मंदी का विचार


शनि के उदय के तीन दिन बाद रूई तेज होती है। मूंग, मशाले, चावल, गेहूं के भावोंमें घटा-बढ़ी होती रहती है। अश्विनी और भरणी नक्षत्र में शनि वक्री हो तो एक वर्ष तक पीड़ा; धान्य और चौपायो  का मूल्य बढ़ जाता है। मघा नक्षत्र पर वक्री होकर आश्लेषा पर जब गुरु आता है तो गेहूँ, घी, शाल, प्रबाल तेज होते हैं। ज्येष्ठा पर वक्री होकर अनुराधा पर शनि आता है तो सब वस्तुएँ तेज होती हैं। उतराषाढ़ा पर बक्री होकर पूर्वाषाढ़ा पर आता है तो सभी वस्तुओं में अत्यधिक घटा-बड़ी होती है। 

गुरु और शनि दोनों एक साथ वक्री हों तो और शनि १०।११ राशि का हो तो गेहूँ, तिल, तेल आदि पदार्थ ९ महीने तक तेज होते हैं। शनि के बक्री होने के तीन महीने उपरान्त गेहूँ, चावल, मूंग, ज्वार, धान्य, खजूर, जायफल, घी, हल्दी, नील, धनियाँ, जीरा, मेथी, अफीम, घोड़ा आदि पदार्थ तेज और सोना, चाँदी, मणि, माणिक्य आदि पदार्थ मन्दे एवं नारियल, सुपाड़ी, लवंग, तिल, तेल आदि पदार्थो में घटा-बढ़ी होती रहती है। शनि मार्गी हो तो दो मास में तेल, हींग, मिर्च, मशाले तेज और अफीम, रूई, सूत, वस्त्र आदि पदार्थों को मन्द करता है। 

शनि कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और आश्लेषा नक्षत्र में वक्री हो तो सभी वस्तुएं महंगी होती है।

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