दही का प्रयोग कब और केसे करे

दूध में दही का जामन देकर रख देने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़कर दूध को ८-१० घण्टे में ही दही बना देते हैं । यह ताजा दही जीवनी शक्ति सम्वर्धक तत्त्वों से युक्त विशेष शक्तिवर्धक उपादान बन जाता है । रखा रहने पर धीरे-धीरे दही की जीवनी-शक्ति घटती है और वह खट्टा होता जाता है।

दही का प्रयोग कब और केसे करे

दही का प्रयोग कब और केसे करे


दही का प्रयोग कब और केसे करे

दूध में दही का जामन देकर रख देने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़कर दूध को ८-१० घण्टे में ही दही बना देते हैं । यह ताजा दही जीवनी शक्ति सम्वर्धक तत्त्वों से युक्त विशेष शक्तिवर्धक उपादान बन जाता है । रखा रहने पर धीरे-धीरे दही की जीवनी-शक्ति घटती है और वह खट्टा होता जाता है।

बिना मन्थन किया दही, शरीर के श्रोतों में अवरोध पैदा करता है । रोग, आलस्य, कफ,सूजन, मवाद और मोटापा बढ़ाता है। दही-गर्म,अग्निप्रदीपक, कुछ कसैला, थोड़ी खटास युक्त मीठा होता है । दही-स्निग्ध एवं भारी है और वात, पित्त एवं रक्त विकार नाशक होता है । युक्तिपूर्वक सेवन मूत्रकृच्छ, सर्दी, जुकाम, विषमज्वर, अरुचि और दुर्बलता में हितकारी है और बलवीर्य को बढ़ाने वाला है।

जो दही भली भाँति जमा न हो वह मल मूत्र बढ़ाने वाला, त्रिदोषकारी एवं दाह उत्पन्न करने वाला होता है। जो दही ठीक से जमा, गाढ़ा होता है और कुछ खटास युक्त होता है ऐसे सुस्वाद दही को मंथन संस्कार के द्वारा सेवनीय एवं परमोपकारी बना कर ही विवेक पूर्वक सेवन करना चाहिये। मथने से दही एक नई प्रकार की गुणकारी वस्तु बन जाता है।

जिस खट्टे दही में मिठास भी रहे, उसे खट्टा कहते हैं। यह अग्नि प्रदीपक होता है परन्तु पित्त एवं कफ वर्धक होता है । अति खट्टा, मिठास रहित दही अग्नि प्रदीपक होता है परन्तु रक्त विकार, वात, पित्त और कफ सभी को बढ़ाता है । सुस्वाद दही का भी सेवन रात्रि के समय नहीं करना चाहिये - वह हानिप्रद हो जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार रात्रि में दही सेवन गौ-माँस सेवन के तुल्य पाप माना गया है।

दही का सेवन बसंत, ग्रीष्म और शरद ऋतु अर्थात मार्च, अप्रैल, मई, जून, सितम्बर और अक्टूबर में नहीं करना चाहिये । संस्कारित दही का सेवन हेमन्त और शिशिर में अर्थात नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी, फरवरी में विशेष लाभप्रद है। दही से बना रसाला-कफ बढ़ाने वाली बसंत अर्थात मार्च अप्रैल को छोड़कर युक्तिपूर्वक ग्रीष्म ऋतुओं में सेवन किया जा सकता है।

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