ज्योतिष में मोती

चन्द्र ग्रह के कुपित होने पर उससे प्रभावित व्यक्ति को प्रमेह नेत्ररोग, वायू एवं मस्तिष्क रोग हो सकते हैं। कोई भी निश्चय शीघ होता है, जिससे बात की जाये उस पर प्रभाव पड़ता है, विचार अथवा कार्य करने का मन में उत्साह बढ़ता है।

ज्योतिष में मोती
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ज्योतिष में मोती


चन्द्र ग्रह के कुपित होने पर उससे प्रभावित व्यक्ति को प्रमेह नेत्ररोग, वायू एवं मस्तिष्क रोग हो सकते हैं। चन्द्र ग्रह के कुपित होने से जो अनीश्चतता में रहता है, जीवन घोर संघर्षमय बन गया हो, परिस्थितियां प्रतिकुल हो धारण करना चाहिये। मोती धारण करने से बुद्धि स्तिर होती है किसी भी बात को बारीकी से समझने की शक्ति बढ़ती है शरीर में तेज और ओज का विकास होता है। कोई भी निश्चय शीघ होता है, जिससे बात की जाये उस पर प्रभाव पड़ता है, विचार अथवा कार्य करने का मन में उत्साह बढ़ता है। 


कैल्शियम की कमी के कारण उत्पन्न होने वाले रोगों में यह बहुत लाभकारी है। केवड़े या गुलाब जल के साथ खरल में घोटकर पिस्टी बनाई जाती है। मुक्ता की अग्नि से भस्म भी बनाई जाती है। मुक्ता-शीलल, मधुर, शाँतिवर्धक, नेत्र ज्योतिवर्धक, अग्नि दोपक, वीर्यवर्धक, विषनाशक है। कफ, पित्त, श्वांस आदि रोगों में अति लाभदायक है, हृदय को शक्ति देता है। इसका प्रयोग विभिन्न रोगों में विभिन्न अनुमानों के साथ किया जाता है।


धारण विधि:

बहुत से व्यक्ति दो मोतियों की माला ही धारण करते हैं। जोकि काफी वजनदार और मूल्यवान हो जाती है। मोती कम से कम सवा चार रत्ती का पहनना चाहिये। इससे अधिक हो तो और अच्छा है। मोती को चाँदी या पंचधातु की अंगूठी में जड़वा लेना चाहिए। सोमवार के दिन सायंकाल स्वच्छ जल का लौटा लो, उसमें थोड़ा कच्चा दूध डालो, उस लोटे में अंगूठी को छोड़ दो। जल को भगवान शिव को पिण्डी पर चढ़ा दें। अपनी मनोकामना प्रकट करते हुए अंगूठी को भगवान शिव से स्पर्श करके कनिष्टिका ऊँगली या कनकी अंगली या उसके साथ बाली में पहन लेना चाहिये। इसको धारण करने के बाद किसी प्रकार का परहेज नहीं है, कल्पनाशील, भावक व्यक्तियों के लिये मोती अति गुणकारी है।