ज्योतिष में मूंगा

ज्योतिष के अनुसार मूंगा का स्वामी मंगल ग्रह है जिस व्यक्ति पर कुदृष्टि है उसे मूंगा पहनना चाहिये। जो व्यक्ति शत्रुओं से परास्त हो गये हों, जोखिमों को झेलते हुए जो जीवन में अंधेरा देख रहे हों, उन्हें मूंगा धारण करना चाहिये मेष एवं वृश्चिक राशि का राशिपति होने से उनके लिए भाग्योन्नति की बाधाओ को दूर करता है।

ज्योतिष में मूंगा
ज्योतिष,  रत्न, मूंगा


ज्योतिष में मूंगा

ज्योतिष के अनुसार मूंगा का स्वामी मंगल ग्रह है जिस व्यक्ति पर कुदृष्टि है उसे मूंगा पहनना चाहिये। जो व्यक्ति शत्रुओं से परास्त हो गये हों, जोखिमों को झेलते हुए जो जीवन में अंधेरा देख रहे हों, उन्हें मूंगा धारण करना चाहिये मेष एवं वृश्चिक राशि का राशिपति होने से उनके लिए भाग्योन्नति की बाधाओ को दूर करता है। मूंगा रोग नाशक है। रक्त की शुद्धि करता है। भयभीत लोगों का साहस बढाता है। मेष राशि वालों के लिये व्यापार, नौकरी आदि में उन्नति करता है। जो व्यक्ति समाज में कुछ कर दिखाने की इच्छा रखते हैं, उन्हें मूंगा अवश्य ही धारण करना चाहिये। जिन लोगों के जीवन में मुकदमें झगड़े चलते रहते हैं उनको मूंगा अति उत्तम है। मुंगा धारण से स्वाभिमान में वृद्धि विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का साहस, फील्ड वर्क में वृद्धि, समाज में सम्मान प्राप्त होता है। सिंह राशि वाले और अन्य राशि वाले भी मूगा धारण कर सकते हैं। कुम्भ और मकर राशि वालों को मूगा निषेध है।

मूंगा को केवड़ा या गुलाब जल में घिसकर गर्भवती स्त्री के पेट पर लेपन करने से गिरता हुआ गर्भ रुक जाता है। मूंगा को गलाब जल में घिसकर छाया में सुखाने से प्रवाल पिस्टी तैयार होती है। पिस्टी को मधु के साथ खाने से शरीर पुष्ट होता है। पान के साथ खाने से कफ और खांसो को लाभ होता है। मलाई के साथ खाने से शरीर की गर्मी तथा हृदय की घड़कन को लाभ होता है।

धारण विधि:
मूगे को कम से कम ५ रत्ती और सवा सात रत्ती ऊपर का से पहनना चाहिए। सोने, तांबा और अष्टधातु में पहनने से शीघ्र साभकारी होता है। मूगा, मेष, सिंह, वृश्चिक राशि वालों को अत्यधिक लाभकारी होता है । मूगे को मंगलवार के दिन सायंकाल के समय गर्दन भुजा या अंगली में धारण करना चाहिए। अथवा मुंगे को अंगूठी में जड़वाकर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों से स्पर्श कर कनकी अंगुली में धारण कर लेना चाहिये।