ज्योतिष में पुखराज

पुखराज का स्वामी (गुरु वृहस्पति) है। गुरु किसी का बुरा नहीं चाहता। भाई-बहिन, माता-पिता, कुटुम्ब परिवार, पति-पत्नी, सभी रिश्तों में प्रेम बढ़ाता है। गुरु अधिपति होने से साधु सन्त, महात्मा भी इसे धारण कर सकते है।

ज्योतिष में पुखराज
ज्योतिष,माणिक

ज्योतिष में पुखराज



ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को देवगुरु वृहस्पति का प्रतीक माना है. सौभाग्य का प्रतीक है। इसके प्रयोग से वैवाहिक जीवन में मधुरता पैदा होकर सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पुखराज रोग नाशक कीति और पराक्रम की वृद्धि करने वाला, आयु एवं सम्पत्ति का वर्धक माना गया है। सांसारिक सुख एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है। विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो शीघ और सुलभ हो जाता है, ग्रहस्थ जीवन जिसका अनुकुल न हो अथवा पत्नी सुशील और सुयोग्य चाहते हों गृहस्थी जीवन सुखमय बनाना चाहते हो, उन्हें असली पुखराज अवश्य धारण करना चाहिये। पुखराज पहनने वालों की प्रतिष्ठा दिनों दिन बढ़ती है। मन में उत्साह बना रहता है। रुके काम बनने लगते है। लेखक, वकील बुद्धिजीवियों के लिए अत्यन्त लाभकारी है।


पुखराज को गुलाब जल और केवडा के जल में पच्चीस दिन तक घोटना चाहिये, जब काजल की भांति घट जाये तब उसे छाया में सुखाकर रख लें। यह पुखराज पिस्टी तैयार हो गयी। पुखराज की भस्मी भी बनाई जाती है। पुखराज की भस्म या पिस्टी. पीलिया, कफ, खांसी, श्वांस, नक्सीर आदि अनेक रोगों में दी जाती है।

पुखराज का स्वामी (गुरु वृहस्पति) है। गुरु किसी का बुरा नहीं चाहता। भाई-बहिन, माता-पिता, कुटुम्ब परिवार, पति-पत्नी, सभी रिश्तों में प्रेम बढ़ाता है। गुरु अधिपति होने से साधु सन्त, महात्मा भी इसे धारण कर सकते है।

पुखराज ५ रत्ती का सोने की अंगठी में जड़वा लेना चाहिए। गुरुवार के दिन केले के वृक्ष का पूजन करें, पूजन करते समय अंगूठी को वृक्ष की जड़ में रख देना चाहिए, पूजा समाप्ति पर अगठी को केले के वृक्ष से स्पर्श कर रिंग-फिगर में पहन लेना चाहिये पुखराज को स्त्रो, पुरुष कोई भी पहन सकता है। वैसे तो पृख राज धनु और मीन राशि के लिये है परन्तु इसे कोई भी धारण कर सकता है। इसके धारण करने से घर बैठे रिश्ते आने लगते हैं। वैवाहिक कठिनाई शीघ्र ही हल हो जाती है। यह अनुभव सिद्ध प्रयोग है।