ज्योतिष में पन्ना

पन्ना बुधग्रह का पूज्य रत्न है । बुध ग्रह के विपरीत होने पर मिथन और कन्या राशि वालों को पन्ना धारण करना चाहिये । पन्ना पाप नाशक है। संकट से बचाता है। बुद्धि दाता है, मानसिक शान्ति मिलती है, क्रोध को शान्त करता है। नेत्रों की ज्योति बढ़ाता है। इस रत्न में अनोखी विकरण शक्ति विद्यमान है। शरीर को स्वस्थ और मन को प्रसन्न रखता है।

ज्योतिष में पन्ना
budh

ज्योतिष में पन्ना


पन्ना हरे रंग का चमकदार पत्थर होता है। पीत आभायुक्त हरितवर्ण पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। आदिकाल से ही चिकित्सकों ने पन्ने की बल वीर्यवर्वक गुणों को सभी ने स्वीकार किया है। रत्नों का रोगों में प्रयोग पिष्टिका, भस्म चूर्ण एवं सूर्य रश्मि चिकित्सा में होता चला आया है। आयुर्वेद में पन्ने की भस्म ठण्डी, रुचिकारक मेदवर्धन, क्षुधावर्धक होती है तथा अम्लपित्त और दाह (जलन) को नष्ट करतो है। इसके प्रयोग से तीव्र एवं मदु ज्वर, उल्टी, दमा, अजीर्ण, बवासीर, पीलिया आदि में किया जाता है। किसी वैद्य के परामर्श से ही दवा का प्रयोग करना चाहिये, नहीं तो लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है। 


पन्ना बुधग्रह का पूज्य रत्न है । बुध ग्रह के विपरीत होने पर मिथन और कन्या राशि वालों को पन्ना धारण करना चाहिये । पन्ना पाप नाशक है। संकट से बचाता है। बुद्धि दाता है, मानसिक शान्ति मिलती है, क्रोध को शान्त करता है। नेत्रों की ज्योति बढ़ाता है। इस रत्न में अनोखी विकरण शक्ति विद्यमान है। शरीर को स्वस्थ और मन को प्रसन्न रखता है। 

धारण विधि:--

पन्ना रत्न को कम से कम साढ़े चार रत्ती का पहनना चाहिये। इस रत्न को चांदी और पंचधातु की अंगठी में जड़वाकर पहना जाता है। बुधवार के दिन सूर्य उदय से पूर्व ही उठकर शोच स्नान से निवृत्त हो जाना चाहिये। उसके बाद मन्दिर में या अपने पूजा स्थल में बैठकर अपनी मनोकामना को अपने इष्ट से प्रकट करें। तथा उसे पूरा करने की प्रार्थना भी करें। रत्न जडित अंगठी को धूप-दोप-पुष्प से पूजित करें और अपने इष्टदेव के चरणों में स्पर्श कर हाथ की कनिष्ठा अंगूली में धारण कर लें। कोई किसी प्रकार का विशेष परहेज नहीं है।