कुंडली विश्लेषण-1

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कुंडली विश्लेषण-1

कुंडली विश्लेषण 

यह कन्या लग्न की कुण्डली है; अत यहा 'गुरु' का सप्तमाधिपति तथा सप्तम भाव कारक एक साथ हो जाना अत्यन्त महत्व रखता है । अब पति-कारक गुरु आदि पर थोडा विचार कीजिये । सूर्य न केवल अपनी दृष्टि से सप्तमभाव पर अपना प्रभाव डाल रहा है अपितु अपनी युति से सप्तमेश तथा पति-कारक गुरु को भी प्रभावित कर रहा है। शनि भी अपनी तृतीय दृष्टि द्वारा उसी प्रतिनिधित्व शाली गुरु को प्रभावित कर रहा है। इसी प्रकार राह-अधिष्ठित राशि का स्वामी, बुध भी अपनी युति द्वारा उसी गुरु तथा सप्तम भाव को प्रभावित कर रहा है। अब चूंकि सूर्य, शनि तथा राहु, तीनो के तीनों, पृथक्ताजनक (Separative) ग्रह है अत इन के प्रभाव का फल यह हुआ कि इस बालिका को उस के पति ने विवाह के एक मास के अन्दर ही अन्दर त्याग दिया। यदि लडकी को विवाह से पूर्व पुखराज पहनाया जाता तो बहुत सम्भव था कि बात त्याग तक न पहुँचती।

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