अन्न के दाने को अंकुरित केसे करे?

दानों को बीन चुनकर साफ करके एक चीनी मिट्टी, कांच या स्टील के गिलास में तिहाई भर लें और पानी डालकर २-३ बार धो कर स्वच्छ कर लें। अन्य धातुओं के गिलास या बर्तन न लें । अब गिलास लगभग पानी से भर दें जो १ अंगुल खाली रहे । गर्मी में आठ दस घण्टे बाद और जाड़ों में १२-१४ घण्टे बाद गिलास के बचे पानी को गिलास पर उँगलियाँ या कोई जाली लगाकर उलट कर पूरी तरह निकाल लें। यह निकला जल भी सेवनीय (टानिक) होता है अत: इसको पी लेना ही अच्छा है।

अन्न के दाने को अंकुरित केसे करे?

अन्न के दाने को अंकुरित केसे करे?


अन्न के दाने को अंकुरित केसे करे?

दानों को बीन चुनकर साफ करके एक चीनी मिट्टी, कांच या स्टील के गिलास में तिहाई भर लें और पानी डालकर २-३ बार धो कर स्वच्छ कर लें। अन्य धातुओं के गिलास या बर्तन न लें । अब गिलास लगभग पानी से भर दें जो १ अंगुल खाली रहे । गर्मी में आठ दस घण्टे बाद और जाड़ों में १२-१४ घण्टे बाद गिलास के बचे पानी को गिलास पर उँगलियाँ या कोई जाली लगाकर उलट कर पूरी तरह निकाल लें। यह निकला जल भी सेवनीय (टानिक) होता है अत: इसको पी लेना ही अच्छा है।

अब इस गिलास के ऊपर एक सादा चिकनी कटोरी रखकर उलट कर किसी अलमारी के कोने में रख दें जो धूप से गर्म न होती हो और कोई उस गिलास को छुए-छेड़े नहीं । २४ घण्टे बाद उस गिलास पर रखी कटोरी को दबाए हुए गिलास को उलट कर सीधा कर दें। इस प्रकार रखे गिलास में गर्मी के मौसम में २४ घण्टे बाद आपको अच्छे अंकुर प्राप्त हो जावेंगे। ठंड के दिनों में सीधे किये गिलास पर कटोरी उलट कर रख देंगे तो अगले १२ या २४ घंटे बाद बढ़िया अंकुर मिलेंगे। मूंग में अंकुर जल्दी, २४ घण्टे में ही प्राप्त हो जाते हैं अत: इनको १२ घण्टे बाद ही पलटना अच्छा होता है। गेहूं के अंकुरों को मुलायम बनाने को ४८ घण्टे बाद तैयार हुए अंकुरों में पानी डालकर अंकुर हिलाकर जल निकालकर पी लेते हैं और २-३ घण्टे बाद सेवन करते हैं तो वह मुलायम हो जाते हैं।

दूध की तरह इनमें शहद, गुड़ की चासनी, देसी खाण्ड, वूरा, खजूर या किसमिस मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं। एक बार के सेवन के लिये २५ ग्राम गेहूं के अंकुर ही पर्याप्त होते हैं । अति सेवन तो सभी वस्तुओं का ठीक नहीं होता है। साथ में थोड़े-थोड़े मूंग व चना आदि के अंकुर नमक एवं सलाद के साथ लिये जा सकते हैं, और पेट भरने को कुछ दलिया, खिचड़ी या रोटी चल सकती है। किसी भी नए प्रयोग के लिये उसका अभ्यस्त होने के लिये कुछ समय की अपेक्षा होती है।

गर्मियों के दिनों में अंकुर करने के गिलासों को एक थाली में पानी डालकर रखना होता है और ऊपर से एक भीगा मोटा कपड़ाया तौलिया डालना पड़ता है जिससे अधिक गर्मी के कारण उमस कर अंकुर खराब न हों। अधिक ठण्ड के दिनों में अंकुर ४८ घण्टे की जगह ७२ घण्टे में तैयार हो पाते हैं।

गेहूं के अंकुरों के साथ शहद आदर्श है, परन्तु इसकी जगह एक वर्ष पुराने बिना मसालों से बने गुड़ या खाण्ड की चासनी भी मजे से चल सकती है। यह चासनी गुड़ में चौथाई भाग (१/४) पानी डालकर उबाल दे देने से सरलता से तैयार हो जाती है और इसको छानकर किसी साफ शीशी में रख लें तो ८१० दिन तक खराब भी नहीं होती है। चीनी का प्रयोग तो सदैव हानिप्रद होता है।

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