वास्तु दिशाएँ

धरातल स्तर में आठ दिशाएँ होती हैं पूर्व, उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण), उत्तर, उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण), पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण), दक्षिण व दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण)।

वास्तु दिशाएँ

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दिशाएँ

दिशाओं के ज्ञान को ही वास्तु कहते हैं। यह एक ऐसी पद्धति का नाम है, जिसमें दिशाओं को ध्यान में रखकर भवन निर्माण किया जाता है। वास्तु के अनुसार भवन निर्माण करने पर घर-परिवार में खुशहाली आती है।

वास्तु विज्ञान∕शास्त्र जिसे भवन निर्माण कला में दिशाओं का विज्ञान भी कहा जा सकता है,  इसे समझाने के लिए सर्वप्रथम दिशाओं के विषय में जानना आवश्यक है। हम सभी जानते हैं कि धरातल स्तर में आठ दिशाएँ होती हैं पूर्व, उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण), उत्तर, उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण), पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण), दक्षिण व दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण)।

ऊपर आकाश व नीचे पाताल को सम्मिलित करने पर दस दिशाओं में पूरा भूमंडल∕संसार व्याप्त है अथवा कहा जा सकता है कि पूरे विश्व को एक स्थल में केन्द्र मानकर दस दिशाओं में व्यक्त किया जा सकता है।

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