सूर्य ग्रह शान्ति के घरेलू टोटके

पीले शीशे की बन्द बोतल में शुद्ध पानी भरकर धूप में रखें और इस पानी को सोते समय दो चम्मच पियें। निर्बल सूर्य को सबलता प्राप्त होगी।

सूर्य ग्रह शान्ति के घरेलू टोटके

सूर्य ग्रह शान्ति के घरेलू टोटके

सूर्य ग्रह शान्ति के घरेलू टोटके

१. पीले शीशे की बन्द बोतल में शुद्ध पानी भरकर धूप में रखें और इस पानी को सोते समय दो चम्मच पियें। निर्बल सूर्य को सबलता प्राप्त होगी।
२. दिन में सोयें नहीं और रति न करें।
३. सूर्य कुपित हो, तो आग्नेय कोण में पानी का बड़ा मटका रखें और यह पानी प्रतिदिन बदलकर फेंक दें।
४. ईशान में हैंडपम्प या कुआँ बनवायें।
५. नारियल तेल दान दें और उपयोग न करें।
६. यथासम्भव ऋण या दान न लें।
७. आचरण एवं व्यवहार को सही रखें।
८. लोहे या लकड़ी के कार्य न करें।
९. सोना, चाँदी, श्वेत-पीत कपड़े आदि के कार्य करें और पहनें।
१०. सन्तान प्राप्ति के उपाय निरन्तर करते रहें।
११. रसोईघर पूर्व दिशा के आग्नेय कोण में बनवायें।
१२. मुर्गा, पक्षी, लाल मुँह वाले बन्दर एवं बच्चों का पालन-पोषण करें।
१३. परम्परागत पैत्रिक रीतियों को जारी रखें।
१४. धर्मस्थल की किसी भी पूजा-सामग्री को घर में रखें।
१५. सिरहाने में चाँदी या पानी रखकर सोयें।
१६. भूमि के अन्दर तहखाने या भट्टी न बनवायें।
१७. कुत्तों को भोजन करायें।
१८. चूल्हे को दूध के छीटों से बुझायें।
१९. बुध ग्रह की शान्ति का उपाय करें।
२०. बन्दर को गुड़ खिलायें।
२१. बाजरा आदि अन्नदान करें और इनका उपयोग खाने में न करें।
२२. ताम्बे का पत्र घर की भूमि के नीचे दबायें।
२३. नमक कम प्रयोग में लायें।
२४. मीठा खायें।
२५. काली गाय की सेवा करें।
२६. यज्ञ में गेहूँ का हवन करें।
२७. घर में सफेद गाय न रखें।
२८. दक्षिणमुखी घर में न रहें।
२९. रोगियों से दूरी बनाये रखें।
३०. घर में पीतल के बर्तन रखें।
३१. सफेद टोपी पहनें।
३२. काले-नीले-लाल कपड़े न पहनें।
३३. दीनता का प्रदर्शन न करें।
३४. घर में तांबे के पैसे भूमि में गाड़ें। ११ दिन बाद उनमें से एक-एक ४३ दिन तक पानी में अर्पित करें।
३५. शनि ग्रह का ध्यान रखें।
३६. सिरहाने में बादाम की गिरी रखकर सोयें और उन बादामों को एकान्त स्थल पर ईश्वर को अर्पित करें।
३७. मांसाहार एवं उत्तेजक वस्तुओं का व्यवहार न करें।
३८. झूठ और विवाद से बचें।
३९. ससुराल की सम्पत्ति या ससुराल की वस्तुओं के प्रति लालच न रखें (स्त्री मायके की)।
४०. घर जिसमें रहते हों, घुटन या सीलन आदि से मुक्त अर्थात् खुला हुआ रहना चाहिये।
४१. घर की चक्की में आटा पिसवाकर खायें।

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