सर्व ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त मंत्र

सर्व ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त मंत्र

सर्व ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त मंत्र

सर्व ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त मंत्र

सर्व ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त मंत्र

(1) सर्व सिद्धियां प्राप्त मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अहँ अ सि आ उ सा भूर्भुवः स्वः चक्रेश्वरी देवी सर्व रोगं भिंद भिंदं ऋद्धि वृद्धि कुरु कुरु स्वाहा।
विधि-श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार जाप करने से स्त्री संबन्धी समस्त कठिन रोगों का नाश होता है और सर्व सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

(2) सर्व सिद्धि प्रदायक मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लू णमो लोए सव्वसाहूणं।
विधि- २५ हजार बार जाप कर मंत्र सिद्धि करें, फिर प्रतिदिन तीन माला जपें।

(3) ऋद्धि-सिद्धि मंत्र- ॐ ह्रीं णमो अरहंताणं मम ऋद्धिं वृद्धिं समीहितं कुरु-कुरु स्वाहा।
विधि- शुद्ध होकर प्रतिदिन १०८ बार जाप करें तो सर्व प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होगी।

(4) ऋद्धि-सिद्धि-अर्ह मंत्र- ॐ ह्रीं णमो अरहंताणं मम ऋद्धि वृद्धि समीहितं कुरु कुरु स्वाहा।
विधि- शुद्ध होकर प्रतिदिन प्रातः सायं बत्तीस बार इस मंत्र का जाप करें तो सर्व प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है।

(5) ऋद्धि सिद्धि बढ़ाने का मंत्र- ॐ ह्रीं हूं सः स्वाहा।
विधि- ११ रविवार के दिनों में रात्रि के समय सोने के पूर्व १०८ बार जपने से ऋद्धि सिद्धि बढ़ती है।

(6) अनेक सिद्धि मंत्र- ॐ ह्रीं णमो जिणाणं
विधि- प्रतिदिन इस मंत्र का १०८ बार जाप करना चाहिए।

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