रत्न विज्ञान

रत्न विज्ञान

रत्न विज्ञान

रत्न विज्ञान

भारतीय ज्योतिष शास्त्रानुसार मानव जीवनयापन करने के लिए सात प्रमुख ग्रह हैं १. सूर्य, २. चन्द्रमा, ३. मंगल, ४. बुध, ५. बृहस्पति, ६. शुक्र, ७. शनि। राहु-केतु दोनों छाया ग्रह हैं अत: ये भी मानव जीवन को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से अवश्य ही प्रभावित करते हैं।



बृहस्पति, मंगल और चन्द्रमा ये मनुष्य के बाह्य व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं। जबकि शुक्र, बुध, सूर्य और शनि मनुष्य के आन्तरिक व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं।



सूर्य मनुष्य की आत्मा को, चन्द्रमा मन को, मंगल धैर्य को, बुध वाणी को, बृहस्पति ज्ञान को, शुक्र वीर्य को और शनि सम्वेदना का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक ग्रह किसी न किसी गुण को या किसी न किसी दोष को संचालित करता है। जिससे मनुष्य जीवन प्रभावित होता है।


भारत के प्राचीन विद्वानों ने रल विज्ञान की खोज की भी। इसका सम्बन्ध ग्रहों से है और रंगों से भी है। ग्रह नौ है और मुख्य रत्ल भी नौ हैं (हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, पुखराज, नीलम, लहसुनिया, गोमेद, मुंगा)। रत्नों के द्वारा मनुष्य को रंगों से होने वाला लाभ भो प्राप्त होता है। आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार रत्नों की रसायन या भस्मो बनाकर अनेक रोगों का उपचार किया जाता है। अतः मनुष्य शरीर पर रत्नों के स्पर्श और घर्षण का भी प्रभाव होता ही है।


ज्योतिष विद्या से भी भारत में अनेक प्रकार की खोज की गयो ज्योतिष विद्या सत्य है। कोई रोग होता है तो उसको औषधि भी होती है। ग्रहों का प्रकोप होगा तो उसका औषधि रत्न भी है। ग्रह आकाश में है, तो रत्न पृथ्वी पर है। ग्रह रंग वाले हैं तो रत्न भी रंगीन हैं मानव शरीर के रंग से इसका कैसे ताल मेल बैठाया जाये। ज्योतिष ने इसका निदान कर लिया और उपचार बतलाया। मनुष्य के शरीर में जिस ग्रह प्रकोप से जिस रग की कमी आ गई हो, उसकी पूर्ति करने के लिये उस राशि स्वामी ग्रह के अनुसार रंग वाला नग धारण कराया जाये।

विद्वानों की मान्यता है कि माणिक, मुक्ता, विद्म पन्ना, पुखराज, हीरा, मोलम, गोमेद और लहसुनिया इन प्रधान नवरत्नों की उत्पत्ति क्रमश.-सर्य, चन्द्र, मंगल, बुद्ध बृहस्पति, शुक्र, शनि राह और केतु इन प्रधान नव ग्रहों की पृथ्वी के सतत् प्रधान स्थानों पर, सीधा (डायरेक्ट) किरणों के पड़ने के प्रभाव से उन ग्रहों में विद्यमान विशेष तत्त्वों से होती है। यही कारण है कि जैसा जिस ग्रह का रंग होता है उस ग्रह से सम्बन्धित रत्न को भी वैसा हो रंग प्राप्त होता है। इसी कारण इन रत्नों में उन ग्रहों की विशेष शक्ति सम्मिलित रहती है। जो कि समय पर रत्नादि के धारण द्वारा सुख-दुःख आदि के होने से स्पष्टतया अनुभव में आती है। इससे यह स्पष्ट सिद्ध हो जाता है कि पृथ्वी में उत्पन्न होने वाले इन पत्थरों (रत्नों) का भी मानव जीवन में प्रभावशाली उपयोग होता है । यह उपयोग विज्ञान द्वारा भी समर्थित है।


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