ज्योतिष और भौतिक समृद्धि

यदि ९-वें घर का स्वामी ९-वें घर में है, या १० वें घर में है, या लग्न में है, या २-रे या ५वें घर में है, या उच्च-राशिस्थ है या ९-वें घर को देख रहा है, तो वह व्यक्ति भाग्यशाली होगा।

ज्योतिष और भौतिक समृद्धि

ज्योतिष और भौतिक समृद्धि

ज्योतिष और भौतिक समृद्धि

जहाँ तक भौतिक समृद्धि और व्यावसायिक स्तर का सम्बन्ध है, ९-वें और १०-वें घर की परीक्षा करनी चाहिए। यदि ९-वें घर का स्वामी ९-वें घर में है, या १० वें घर में है, या लग्न में है, या २-रे या ५वें घर में है, या उच्च-राशिस्थ है या ९-वें घर को देख रहा है, तो वह व्यक्ति भाग्यशाली होगा तथा अपने जन्मकालीन सामाजिक व वित्तीय स्तर से पर्याप्त उन्नत स्तर को प्राप्त होगा।

लग्न, ५वें, ९-वें तथा १०वें (१,५,९,१०) घरों के स्वामियों के अपने-अपने घर परस्पर बदल लेने से महान समृद्धि, शक्ति तथा यश की प्राप्ति होती है। ९-वें और १०वें घरों के स्वामियों के एक-दूसरे के घर में होने से अथवा ५-वें और ९-वें घरों के स्वामियों के परस्पर घर बदल लेने से, अथवा लग्न व ९-वें घर के स्वामियों के परस्पर घर-परिवर्तन से महान सौभाग्य का उदय होता है। ऐसी अवस्थाओं में बुरे ग्रह भी उस व्यक्ति को धनी व यशस्वी बना देते हैं।

भाग्य-स्थान (९-वां घर - सौभाग्य का घर) का स्वामी लग्न में होना पर्याप्त अच्छा है। इसी प्रकार लग्न के स्वामी का भाग्यस्थान में होना भी अच्छा है। यदि ५वें और ९वें घरों के स्वामी, दोनों ही, लग्न में है तो वह व्यक्ति यश और धन को प्राप्त करेगा। यानी ९वें घर में एक या अधिक ग्रहों का एकत्र होना सौभाग्य और समृद्धि का दाता है। इस घर में ग्रहों की जितनी अधिक संख्या होगी, उतनी ही अधिक आनन्द-स्थिति होगी।

इसी प्रकार, ५वें घर में भी एक या अधिक ग्रहों का एकत्र होना समृद्धि का द्योतक है, जितने अधिक, उतने ही श्रेष्ठ।

लग्न में या २रे, ३रे अथवा ११वें घरों में तीन या चार ग्रहों की उपस्थिति भी महान् समृद्धि देती है क्योंकि दो-दो घरों के स्वामी होने के कारण उनमें से कुछ का ५वें, ९-वें व १०वें घरों का मालिक होना निश्चित ही है।

अच्छा यही है की ६, ८, १२ घर में कोई ग्रह ना हो।

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