मंगल का द्वादश राशियों में स्थित होने पर विश्व में होने वाले प्रभाव

मंगल का द्वादश राशियों में स्थित होने पर विश्व में होने वाले प्रभाव

मंगल का द्वादश राशियों में स्थित होने पर विश्व में होने वाले प्रभाव

मंगल का द्वादश राशियों में स्थित होने पर विश्व में होने वाले प्रभाव

मंगल का द्वादश राशियों में स्थित होने पर विश्व में होने वाले प्रभाव

 
मेष राशि में मंगल स्थित हो तो सभी प्रकार के अनाज महँगे होते हैं। वर्षा अल्प होती है तथा धान्य की उत्पत्ति भी अल्प ही होती है। पूर्वीय प्रदेशों में वर्षा साधारणतया अच्छी होती है। उत्तरीय प्रदेशों में खण्ड वृष्टि पश्चिमीय प्रदेशों में वर्षा का अभाव या अत्यल्प तथा दक्षिणीय प्रदेशों में साधारण वृष्टि होती है। मेषराशि का मंगल जनता में भय और आतंक भी उत्पन्न करता है।

वृषराशि में मंगल के स्थित होने से साधारण वृष्टि देश के सभी भागोंमें होती है। चना, चीनी और गुड़का भाव कुछ महँगा होता है। महामारी के कारण मनुष्योंकी मृत्यु होती है। बंगाल के लिए मंगल की उक्त स्थिति अधिक भयावह होती है। मंगल की उक्त स्थिति बर्मा, चीन और जापान के लिए राजनैतिक दृष्टि से उथल-पुथल करनेवाली होती है। नेताओं में मतभेद, फूट और कलह रहने से जनसाधारणको भी कष्ट होता है। पूर्वी पाकिस्तान के लिए वृष का मंगल अनिष्टप्रद होता है। खाद्यान का अभाव होने के साथ भयङ्कर बीमारियाँ भी उत्पन्न होती हैं।

मिथुनराशि में मंगल के स्थित होने से अच्छी वर्षा होती है। देश के सभी राज्यों और प्रदेशों में सुभिक्ष, शान्ति, धर्माचरण, न्याय, नीति और सच्चाई का प्रसार होता है। अहिंसा और सत्य का व्यवहार बढ़ने से देश में शान्ति बढ़ती है। सभी प्रकारके अनाज समर्थ रहते हैं। सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा, काँसा, पीतल आदि खनिज धातुओं के व्यापार में साधारण लाभ होता है। पंजाब में फसल बहुत अच्छी उपजती है। फल और तरकारियाँ भी अच्छी उपजती हैं।

कर्कराशि में मंगल हो तो भी सुभिक्ष और उत्तम वर्षा होती है उत्तरप्रदेश में काशी, कन्नौज, मथुरा में उत्तम फसल नहीं होती है, अवशेष स्थानोंमें उत्तम फसल उपजती है। 

सिंहराशि में मंगल के रहने से सभी प्रकार के धान्य महंगे होते हैं। वर्षा भी अच्छी नहीं होती। राजस्थान, गुजरात, मध्यभारत में साधारण वर्षा होती है। भाद्रपद मास में वर्षा का योग अत्यल्प रहता है। आश्विन मास वर्षा और फसल के लिए उत्तम माने जाते हैं। सिंहराशि के मंगल में क्रूर कार्य अधिक होते हैं, युद्ध और संघर्ष अधिक होते हैं। राजनीति में परिवर्तन होता है। साधारण जनता को भी कष्ट होता है। आजीविका साधनों में कमी आ जाती है।

कन्याराशि के मंगल में खण्डवृष्टि, धान्य सस्ते, थोड़ी वर्षा, देशमें उपद्रव, क्रूर कार्यों में प्रवृत्ति, अनीति और अत्याचार का व्यापक रूप से प्रचार होता है। बंगाल और पंजाब में नाना प्रकार के उपद्रव होते हैं। महामारी का प्रकोप आसाम और बंगाल में होता है। उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के लिए कन्या राशि का मंगल अच्छा होता है।

तुलाराशि के मंगल में किसी बड़े नेता या व्यक्तिकी मृत्यु, अस्त्र-शस्त्रकी वृद्धि, मार्गमें भय, चोरोंका विशेष उपद्रव, अराजकता, धान्यका भाव महँगा, रसोंका भाव सस्ता और सोना-चाँदी का भाव कुछ महँगा होता है। व्यापारियोंको हानि उठानी पड़ती है।

वृश्चिक राशि के मंगल में साधारण वर्षा, मध्यम फसल, देश का आर्थिक विकास, ग्रामों में अनेक प्रकार की बीमारियों का प्रकोप, पहाड़ी प्रदेशों में दुष्काल, नदी के तटवर्ती प्रदेशों में सुभिक्ष, नेताओं में संघटन की भावना, विदेशों से व्यापारिक सम्बन्ध का विकास, राजनीति में उथल-पुथल एवं पूर्वीय देशों में महामारी फलती है।

धनुराशि के मंगल में समयानुकूल यथेष्ठ वर्षा, सुभिक्ष, अनाज का भाव सस्ता, दग्ध-घी आदि पदार्थों की कमी, चीनी-गड आदि मिष्ठ पदार्थों की बहुलता एवं दक्षिणके प्रदेश में उत्पात होता है।

मकर राशि के मंगल में धान्य पीड़ा, फसल में अनेक रोगों की उत्पत्ति, मवेशी को कष्ट, चारे का अभाव, व्यापारियों को अल्प लाभ, पश्चिम के व्यापारियों को हानि, गेहूँ, गुड़ और मशाले के मूल्य में दुगुनी वृद्धि एवं उत्तर भारत के निवासियों को आर्थिक सकंट का सामना करना पड़ता है।

कुम्भ के मंगल में खण्डवृष्टि, मध्यम, फसल, खनिज पदार्थों की उत्पत्ति अत्यल्प, देश का आर्थिक विकास, धार्मिक वातावरणकी वृद्धि, जनतामें सन्तोष और शान्ति रहती है।

मीनराशि के मंगल में एक महीने तक समस्त भारत में सुख-शान्ति रहती है। जापान के लिए मीन राशि का मंगल अनिष्टप्रद है, वहाँ मन्त्रिमण्डल में परिवर्तन, नागरिकों में सन्तोष, खाद्यान्नों की कमी एवं अर्थसंकट भी उपस्थित होता है। जर्मन के लिए मीन राशि का मंगल शुभ होता है। रूस और अमेरिका में परस्पर महानुभाव इसी मंगल में होता है। मीन राशि का माल धान्यों की उत्पत्ति के लिए उत्तम होता है। खनिज पदार्थों की कमी इसी मंगल में होती है। कोयला का भाव ऊँचा उठ जाता है। पत्थर, सीमेण्ट, चूना, आदिके मूल्यमें भी वृद्धि होती है। मीनराशिका मंगल जनता के स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं होता।

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