ज्योतिष

लाभेश का फल
दशमेश का फल
नवमेश का फल
अष्टमेश का फल
अष्टमेश का फल
RAJKUMAR JAIN 21-6-2021

जब अष्टमेश छठे अथवा बारहवें स्थान में हो तो व्यक्ति नित्य रोगी होता है। बाल्यावस्था में उसको जल तथा सर्प से भय होता है।

राजयंत्र विशेष

मंगलीक कुण्डली
मंगलीक कुण्डली

जन्म कुण्डली के लग्न स्थान से म. 1/47/8/12वें स्थान में मंगल हो तो ऐसी कुण्डली मंगलीक कहलाती है।

अस्तग्रह का प्रभाव
अस्तग्रह का प्रभाव

लग्नेश/नवमेश/पंचमेश अस्त हों तो उनके रत्न अवश्य धारण करें। अष्टमेश, द्वितीयेश, सप्तमेश तथा लग्नेश अस्त या पापाक्रान्त हों तो वे अकाल मृत्यु तक दे सकते हैं। ऐसे ग्रहों की दशा में दान-पुण्य तथा शान्ति अनिवार्य है।